Shri Damodarastakam PDF In Hindi | श्री दमोदराष्टकम

नमस्कार दोस्तों , इस पोस्ट के द्वारा आप को Damodarastakam PDF In Hindi को Download करने के लिए देने वाले है। यह आप को पीडीएफ के अलावा इसके lyrics भी दिए गए है। आप Damodarastakam के benefits भी यह जान पाएंगे और इस अष्टकम का बारेमे भी दमोदराष्टकम के लाभ भी बताया गया है। इस Stotra का आप को hindi और sanskrit में इसका meaning भी दिया गया है।

Shri Damodarastakam In Hindi | श्री दमोदराष्टक के बारे में

Damodarastakam PDF In Hindi

यह गीत श्रीकृष्ण के बचपन के शगल का वर्णन करता है जब उन्होंने अपनी माँ से भागने की कोशिश की जब उन्होंने मक्खन चुराने के लिए उन्हें दंडित करने की कोशिश की। कार्तिक महीने के दौरान, दुनिया भर के भक्त हर दिन कृष्ण को घी के दीपक या मोमबत्तियां चढ़ाते हुए इस प्रार्थना को गाते हैं। प्रत्येक श्लोक में भगवान के विभिन्न गुणों का वर्णन किया गया है, जो इस समय में, एक बच्चे के रूप में प्रकट होते हैं और अपने भक्तों के प्यार से खुद को कैद करने की अनुमति देते हैं।

Damodarastakam Lyrics In Hindi | श्री दमोदराष्टक पाठ

।। श्री दमोदराष्टक ।।

।। Shri Damodarastakam ।।

नमामीश्वरं सच्चिदानन्द-रूपं
लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम् ।
यशोदा–भियोलूखलाद् धावमानं
परामृष्टम् अत्यन्ततो द्रुत्य गोप्या ॥1॥

अर्थ :- वह जिनका रूप सत्, चित् और आनंद से परिपूर्ण हैं, जिनके मकरों के आकार के कुंडल इधर उधर हिल रहे हैं, जो “गोकुल” नामक अपने धाम में नित्य शोभायमान हैं,
जो ( दूध और दही से भरी मटकी फोड़ देने के बाद) मैया यशोदा के डर से ओखली से कूदकर अत्यंत तेजी से दौड़ रहे हैं और जिन्हें यशोदा मैया ने उनसे भी तेज दौड़कर पीछे से पकड़ लिया है, उन श्रीभगवान् को मैं नमन करता हूँ।

रुदन्तं मुर्हु नेत्र-युग्मं मृजन्तं
कराम्भोज–युग्मेन सातङ्कनेत्रम् ।
मुहुः श्वासकंप – त्रिरेखाङ्क कण्ठ
स्थितंग्रैवं दामोदरं भक्ति – बद्धम् ॥2॥

अर्थ :- (अपनी माता के हाथ में छड़ी देखकर ) वे रो रहे हैं और अपने कमल जैसे कोमल हाथों से दोनों नेत्रों को मसल रहे हैं, उनकी आँखें भय से भरी हुई हैं,और उनके गले का मोतियों का हार, जो शंख के भांति त्रिरेखा से युक्त है, रोते हुए जल्दी जल्दी श्वास लेने के कारण इधर उधर हिल-डुल रहा है, वे श्रीभगवान् रस्सी से नहीं बल्कि अपने माता के प्रेम से बंधे हुए हैं।

इतीदृक् स्व–लीलार्भि आनन्दकुण्डे
स्व–घोषं निमज्जन्तम् आख्यापयन्तम् ।
तदीयेषित–ज्ञेषु भक्तै जितत्वं
पुनः प्रेमतस् तं शतावृत्ति वन्दे ॥३॥

अर्थ :- ऐसी बाल्यकाल की लीलाओं के कारण वे गोकुलवासियों को आध्यात्मिक प्रेम के आनन्द कुण्ड में डुबो रहे हैं,और जो अपने ऐश्वर्य सम्पूर्ण और ज्ञानी भक्तों को यह बता रहे हैं कि “मैं अपने ऐश्वर्यहीन और प्रेमी भक्तों द्वारा जीत लिया गया हूँ”, उन दामोदर भगवान् को मैं शत शत नमन करता हूँ।

वरं देव मोक्षं न मोक्षावधिं वा
न चान्यं वृणेऽहं वरेशाद् अपीह ।
इदं ते वपुर्नाथ गोपाल-बालं सदा
मे मनस्य् आविरास्तां किम् अन्यैः ।।४।।

अर्थ :- हे भगवान्, आप सभी प्रकार के वर देने में सक्षम हैं फिर भी मैं आप से न ही मोक्ष की कामना करता हूँ, न ही मोक्ष के सर्वोत्तम स्वरूप वैकुण्ठ निवास की इच्छा रखता हूँ, और न ही किसी अन्य वरदान की कामना करता हूँ। मैं तो आपसे बस यही प्रार्थना करता हूँ कि आपका यह बालस्वरूप मेरे हृदय में सर्वदा स्थित रहे, तथा अन्य किसी वस्तु से मुझे क्या लाभ ?

इदं ते मुखाम्भोजम् अत्यन्त-नीलेँ
वृतं कुन्तलैः स्निग्ध–रक्तैश् च गोप्या ।
मुहुश् चुम्बितं बिम्ब – रक्ताधरं मे
मनस्य् आविरास्ताम् अलं लक्ष-लाभैः ॥5॥

अर्थ :- हे प्रभो! आपका श्याम रंग का मुखकमल जो लालिमायुक्त घुंघराले काले बालों से आच्छादित है, मैया यशोदा द्वारा बार बार चुम्बन किया जा रहा है,और आपके होंठ बिम्बफल जैसे लाल है, आपका यह अत्यंत सुन्दर मुखकमल मेरे हृदय में विराजित रहे। अन्य लाखों वरदानों से मुझे कोई लाभ नहीं है।

नमो देव दामोदरानन्त विष्णो
प्रसीद प्रभो दुःख- जालाब्धि-मग्नम् ।
कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति – दीनं बतानु
गृहाणेश माम अज्ञम् एध्य् अक्षि-दृश्यः ॥6॥

अर्थ :- हे दामोदर! हे अनंत! हे विष्णु ! मेरा आपको नमन है। हे प्रभु! आप मुझ पर प्रसन्न हो, क्योंकि मैं संसाररूपी दुःख के समुद्र में डूबा जा रहा हूँ। मुझ दीन-हीन पर आप अपनी अमृतमय कृपा की वर्षा कीजिए और कृपया मुझे दर्शन दीजिए।

कुवेरात्मजौ बद्ध–मूर्त्येव यद्वत्
त्वया मोचितौ भक्ति–भाजौ कृतौ च।
तथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ न
मोक्षे ग्रहो मेऽस्ति दामोदरेह ॥7॥

अर्थ :- हे दामोदर ! (जिनके पेट से रस्सी बंधी हुई हैं) अपनी माता यशोदा द्वारा ओखली में बंधे होने के बाद भी, कुवेर के पुत्रों (मणिग्रिव तथा नलकुवर), जो नारदजी के श्राप के कारण वृक्ष के रूप में मूर्ति की तरह स्थित थे, उनका उद्धार किया और उनको भक्ति का वरदान दिया, आप उसी प्रकार से मुझे भी प्रेमभक्ति प्रदान कीजिए, यही मेरा एकमात्र आग्रह है, किसी मोक्ष की मुझे कोई कामना नहीं है।

नमस्ते स्तु दाम्ने स्र्फु दीप्ति-धाम्ने
त्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्ने ।
नमो राधिकायै त्वदीय- प्रियायै
नमोऽनन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥8॥

अर्थ :- हे दामोदर! आपके पेट से बंधी हुई महान रस्सी को प्रणाम है, और आपके पेट, जो निखिल ब्रह्म तेज का आश्रय है, और जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का धाम है, को भी प्रणाम है। आपकी सर्वप्रिया श्रीमती राधिका को प्रणाम ! और अनन्त लीलाएँ करने वाले भगवान्, आपको भी मेरा प्रणाम है।

।। इति दमोदराष्टक सम्पूर्णम् ।।

Damodarastakam PDF In Hindi | श्री दमोदराष्टक पीडीएफ इन हिन्दी

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