Neel Saraswati Strotam PDF In Hindi | नील सरस्वती स्तोत्र

नमस्कार दोस्तों , इस पोस्ट के द्वारा आप को Neel Saraswati Strotam PDF In Hindi को Download करने के लिए देने वाले है। यह आप को पीडीएफ के अलावा इसके lyrics भी दिए गए है। आप Neel Saraswati Strotam के benefits भी यह जान पाएंगे और इस स्त्रोत का बारेमे भी यह नील सरस्वती स्तोत्र के लाभ भी बताया गया है। इस Stotra का आप को hindi में इसका meaning भी दिया गया है।

Neel Saraswati Stotram / नील सरस्वती स्तोत्र हिंदी में अर्थ सहित

माँ सरस्वती का ही स्वरूप है नील सरस्वती नील सरस्वती को धन, सुख, समृद्धि देने वाली देवी कहा गया है पुराणों में भी इस बात को कहा गया है कि सरस्वती माँ के नील स्वरूप को पूजने से शत्रु पराजित होते हैं नील सरस्वती स्तोत्र देवी सरस्वती को समर्पित एक अत्यंत ही शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसके पाठ से व्यक्ति को सक पा ज्ञान की प्राप्ति होती है।

Neel Saraswati Strotam PDF In Hindi

यह एक सिद्ध सरस्वती स्तोत्र है। जिसके प्रभाव से साधक की बुद्धि तीक्ष्ण होती है तथा उसके अंदर आत्मज्ञान जागृत होता है। बहुत से साधक यह ज्ञात करना चाहते हैं की नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ अष्टमी, नवमी व चतुर्दशी के दिन करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है । यह एक शत्रु नाशक नील सरस्वती स्तोत्र है जो साधक के समस्त शत्रुओं का नाश कर देता है।

हर व्यक्ति के जीवन में कोई दुश्मन या दुश्मनी न हो ऐसा नहीं होता है। दुश्मन प्रत्यक्ष या कभी-कभी व्यक्तिगत रूप से हमला करता है। और हम परेशान हो जाते हैं। हर कोई अपने शत्रुओं से छुटकारा पाना चाहता है और जीवन में  कुछ ठीक करना चाहता है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है। यदि आप अपने शत्रु के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, तो यह नील सरस्वती स्तोत्र (Neel Saraswati Strotam PDF In Hindi) आपके लिए बहुत सहायक सिद्ध होगा, इसके पाठों के माध्यम से हम अपने शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। यह नील सरस्वती स्तोत्र हमारे शत्रुओं का नाश करने में सक्षम है।

नील सरस्वती स्तोत्र के लाभ और फायदे (Benefits)

  • यह स्त्रोत बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। इस स्तोत्र का जाप करने से उनका दिमाग तेज हो जाता है और उनकी पाठ्य प्रणाली में सुधार आ जाता है।
  • नियमित रूप से इसका पाठ करने वाले ज्योतिषी अधिक सटीक भविष्यवाणियां करने में सक्षम होते है
  • वे इस स्तोत्र का जाप कर सकते हैं। जो लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर विदेश जाना चाहते हैं वे भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
  • माना जाता है इस के पाठ से देवी मां अपने उपासकों पर असीम कृपा बनती है और सभी प्रकार के दुर्भाग्य से बचाती हैं और उनके प्रयासों में सफलता प्रदान करती हैं।
  • मंत्र किसी की याददाश्त, समझने की शक्ति और रचनात्मकता में सुधार कर सकता है। यह हमारे संचार कौशल में भी सुधार कर सकता है।
  • जो छात्र अपने सभी परीक्षणों और परीक्षाओं में सफल होना चाहते हैं, वे इस स्तोत्र का जाप कर सकते हैं।
  • यह जीवन में चुनौतियों से सामना के लिए आवश्यक ज्ञान और बुद्धिमत्ता दे सकता है और उनकी प्रगति को अवरुद्ध करने वाली बाधाओं को दूर कर सकता है।
  • इसके पाठों के माध्यम से हम अपने शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। यह नील सरस्वती स्तोत्र हमारे शत्रुओं का नाश करने में सक्षम है।
  • बहुत से साधक यह ज्ञात करना चाहते हैं की नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ अष्टमी, नवमी व चतुर्दशी के दिन करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है

Neel Saraswati Stotram PDF In Hindi Download

दी गई लिंक से आप Neel Saraswati Stotram PDF In Hindi को Download कर सकते हैं। इस लिंक पर क्लिक करते ही आप free download कर इसका पाठ कर पाएंगे। इस लिंक से आप केवल Neel Saraswati Stotram Lyrics pdf को हिन्दी अर्थ सहित में डाउनलोड कर सकते हैं। इसके lyrics आप को नीचे मिल जायेंगे in hindi और इसके meaning भी दिया गया है।

Neel Saraswati Stotram Lyrics In Hindi | नील सरस्वती स्तोत्र का अर्थ सहित अनुवाद

।। नील सरस्वती स्तोत्र ।।

।। Neel Saraswati Stotram Lyrics।।

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि ।
भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् ।।१।।

अर्थ :- भयानक रूपवाली, घोर निनाद करनेवाली, सभी शत्रुओं को भयभीत करनेवाली तथा भक्तों को वर प्रदान करनेवाली हे देवि ! आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।
जापापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम् ।।२।।

अर्थ :- देव तथा दानवों के द्वारा पूजित, सिद्धों तथा गन्धर्वो के द्वारा सेवित और जड़ता तथा पाप को हरनेवाली हे देवि ! आप मुझ शरणागत की रक्षा करें

जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि ।
द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम् ।।३।।

अर्थ :- जटाजूट से सुशोभित, चंचल जिह्वा को अंदर की ओर करनेवाली, बुद्धि को तीक्ष्ण बनानेवाली हे देवि ! आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

सौम्यक्रोधधरे रुपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते ।
सृष्टिरुपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम् ।।४।।

अर्थ :- अर्थात सौम्य क्रोध धारण करनेवाली, उत्तम विग्रहवाली, दृ प्रचण्ड स्वरूपवाली हे देवि ! आपको नमस्कार है । हे सृष्टिस्वरुपिणि ! आपको नमस्कार है, मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला ।
मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम् ।।५।।

अर्थ :- आप मूर्खो की मूर्खता का नाश करती हैं और भक्तों के लिये भक्तवत्सला हैं । हे देवि ! आप मेरी मूढ़ता को हरें और मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

वं हूं हूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः ।
उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम् ।।६।।

अर्थ :- वं हूं हूं बीजमन्त्रस्वरूपिणी हे देवि ! मैं आपके दर्शन की कामना करता हूँ । बलि तथा होम से प्रसन्न होनेवाली हे देवि ! आपको नमस्कार है। उग्र आपदाओं से तारनेवाली हे उग्रतारे ! आपको नित्य नमस्कार है, आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।
मूढ़त्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम् ।।७।।

अर्थ :- हे देवि ! आप मुझे बुद्धि दें, कीर्ति दें, कवित्वशक्ति दें और मेरी मूढ़ता का नाश करें । आप मुझ शरणागत की रक्षा करें।

Neel Saraswati Strotam PDF In Hindi

इन्द्रादिविलसद्द्वन्द्ववन्दिते करुणामयि ।
तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणागतम् ।।८।।

अर्थ :- इन्द्र आदि के द्वारा वन्दित शोभायुक्त चरणयुगल वाली, करुणा से परिपूर्ण, चन्द्रमा के समान मुखमण्डलवाली और जगत को तारनेवाली हे भगवती तारा ! आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां यः पठेन्नरः ।
षण्मासैः सिद्धिमाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ।।९।।

अर्थ :- जो मनुष्य अष्टमी, नवमी तथा चतुर्दशी तिथि को इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह छ: महीने में सिद्धि प्राप्त कर लेता है, इसमें संदेह नहीं करना चाहिए ।

मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।
विद्यार्थी लभते विद्यां तर्कव्याकरणादिकम् ।।१०।।

अर्थ :- इसका पाठ करने से मोक्ष की कामना करनेवाला मोक्ष प्राप्त कर लेता है, धन चाहनेवाला धन पा जाता है और विद्या चाहनेवाला विद्या तथा तर्क व्याकरण आदि का ज्ञान प्राप्त कर लेता है।

इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाऽन्वितः ।
तस्य शत्रुः क्षयं याति महाप्रज्ञा प्रजायते ।।११।।

अर्थ :- जो मनुष्य भक्तिपरायण होकर सतत इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके शत्रु का नाश हो जाता है और उसमें महान बुद्धि का उदय हो जाता है।

पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये ।
य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशयः ।।१२।।

अर्थ :- जो व्यक्ति विपत्ति में, संग्राम में, मूर्खत्व की दशा में, दान के समय तथा भय की स्थिति में इस स्तोत्र को पढ़ता है, उसका कल्याण हो जाता है, इसमें संदेह नहीं है।

इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनिमुद्रां प्रदर्शयेत् ।।१३।।

अर्थ :- इस प्रकार स्तुति करने के अनन्तर देवी को प्रणाम करके उन्हें योनिमुद्रा दिखानी चाहिए।

।। इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।

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