Lakshmi Chalisa Hindi Lyrics 2021 | श्री लक्ष्मी चालीसा

Lakshmi Chalisa Hindi Lyrics

आइये जानते है श्री लक्ष्मी चालीसा को कब पढ़े और इसे पढ़ने के क्या लाभ है। इसका पाठ लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने किये किया जाता है। अगर आप चाहते है की महालक्ष्मी जी की आपके ऊपर भी असीम कृपा को। और आप धन से परिपूर्ण रहे। तो आपको इसका पाठ जरूर करना चाहिए।

लक्ष्मी पूजन (दिवाली) में लक्ष्मी चालीसा के पाठ का अधिक महत्व है। अगर आपको नौकरी नहीं मिल रही है या आपका व्यापर ठीक नहीं चल रहा है। इस प्रकार की समस्या से आपको मुक्ति मेलिगी।

माता लक्ष्मी सुख समृद्धि और धन देवी है। इस कलयुग में लक्ष्मी जी के बिना ये सृष्टि चल ही नहीं सकती। तो अब बात करते है इसका पाठ करे कैसे? तो सबसे पहले आपको ५ कमल के बीज ले लेने है। और आसान लगा कर बैठ जाना है। कमल के बीज सामने रख कर। ११ बार २१ दिन तक लक्ष्मी चालीसा का पाठ करे।

Lakshmi Chalisa Lyrics in Hindi

दोहा

मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥

सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥ टेक॥

सोरठा

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

॥ चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरबहु आस हमारी॥

जै जै जगत जननि जगदम्बा। सबके तुमही हो स्वलम्बा॥
तुम ही हो घट घट के वासी। विनती यही हमारी खासी॥

जग जननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी।

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी। जगत जननि विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिंधु में पायो॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभुहिं बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रकट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

अपनायो तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी। कहं तक महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन- इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मन लाई॥

और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करे मन लाई॥
ताको कोई कष्ट न होई। मन इच्छित फल पावै फल सोई॥

त्राहि- त्राहि जय दुःख निवारिणी। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि॥
जो यह चालीसा पढ़े और पढ़ावे। इसे ध्यान लगाकर सुने सुनावै॥

ताको कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै।
पुत्र हीन और सम्पत्ति हीना। अन्धा बधिर कोढ़ी अति दीना॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं। उन सम कोई जग में नाहिं॥
बहु विधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

करि विश्वास करैं व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी महारानी। सब में व्यापित जो गुण खानी॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयाल कहूं नाहीं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजे॥

भूल चूक करी क्षमा हमारी। दर्शन दीजै दशा निहारी॥
बिन दरशन व्याकुल अधिकारी। तुमहिं अक्षत दुःख सहते भारी॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई॥
रामदास अब कहाई पुकारी। करो दूर तुम विपति हमारी॥

दोहा

त्राहि त्राहि दुःख हारिणी हरो बेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रुन का नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर॥

।। इति लक्ष्मी चालीसा संपूर्णम।।

Laxmi Chalisa Lyrics in English

dohaa

maatu lakshmi kari kripaa karo hriaday men vaas।
manokaamnaa siddh kar puravahu meri aas॥

sindhu sutaa vishnupriye nat shir baarambaar।
riddhi siddhi mangalaprde nat shir baarambaar॥ tek॥

sorthaa

yahi mor ardaas, haath jod vinti karun।
sab vidhi karau suvaas, jay janani jagadambikaa॥

॥ chaupaai ॥

sindhu sutaa main sumiraun tohi। jyaan buddhi vidyaa do mohi॥
tum samaan nahin koi upkaari। sab vidhi purabahu aas hamaari॥

jai jai jagat janani jagadambaa। sabke tumhi ho svalambaa॥
tum hi ho ghat ghat ke vaasi। vinti yahi hamaari khaasi॥

jag janni jay sindhu kumaari। dinan ki tum ho hitkaari॥
vinvaun nity tumahin mahaaraani। kripaa karau jag janani bhavaani।

kehi vidhi stuti karaun tihaari। sudhi lijai apraadh bisaari॥
kripaa driashti chitvo mam ori। jagat janani vinti sun mori॥

jyaan buddhi jay sukh ki daataa। sankat haro hamaari maataa॥
kshir sindhu jab vishnu mathaayo। chaudah ratn sindhu men paayo॥

chaudah ratn men tum sukhraasi। sevaa kiyo prabhuhin bani daasi॥
jab jab janm jahaan prabhu linhaa। rup badal tahan sevaa kinhaa॥

svayan vishnu jab nar tanu dhaaraa। linheu avadhapuri avtaaraa॥
tab tum prakat janakapur maahin। sevaa kiyo hriaday pulkaahin॥

apnaayo tohi antaryaami। vishv vidit tribhuvan ki svaami॥
tum sab prabal shakti nahin aani। kahan tak mahimaa kahaun bakhaani॥

man kram vachan karai sevkaai। man- echchhit vaanchhit phal paai॥
taji chhal kapat aur chaturaai। pujahin vividh bhaanti man laai॥

aur haal main kahaun bujhaai। jo yah paath kare man laai॥
taako koi kasht n hoi। man echchhit phal paavai phal soi॥

traahi- traahi jay duahkh nivaarini। trividh taap bhav bandhan haarini॥
jo yah chaalisaa pdhe aur pdhaave। ese dhyaan lagaakar sune sunaavai॥

taako koi n rog sataavai। putr aadi dhan sampatti paavai।
putr hin aur sampatti hinaa। andhaa badhir kodhi ati dinaa॥

vipr bolaay kai paath karaavai। shankaa dil men kabhi n laavai॥
paath karaavai din chaalisaa। taa par kripaa karain gaurisaa॥

sukh sampatti bahut si paavai। kami nahin kaahu ki aavai॥
baarah maas karai jo pujaa। tehi sam dhany aur nahin dujaa॥

pratidin paath karai man maahin। un sam koi jag men naahin॥
bahu vidhi kyaa main karaun bdaai। ley parikshaa dhyaan lagaai॥

kari vishvaas karain vrat nemaa। hoy siddh upjai ur premaa॥
jay jay jay lakshmi mahaaraani। sab men vyaapit jo gun khaani॥

tumhro tej prabal jag maahin। tum sam kou dayaal kahun naahin॥
mohi anaath ki sudhi ab lijai। sankat kaati bhakti mohi dije॥

bhul chuk kari kshmaa hamaari। darshan dijai dashaa nihaari॥
bin darashan vyaakul adhikaari। tumahin akshat duahkh sahte bhaari॥

nahin mohin jyaan buddhi hai tan men। sab jaanat ho apne man men॥
rup chaturbhuj karke dhaaran। kasht mor ab karahu nivaaran॥

kahi prkaar main karaun bdaai। jyaan buddhi mohin nahin adhikaai॥
raamdaas ab kahaai pukaari। karo dur tum vipati hamaari॥

dohaa

traahi traahi duahkh haarini haro begi sab traas।
jayati jayati jay lakshmi karo shatrun kaa naash॥

raamdaas dhari dhyaan nit vinay karat kar jor।
maatu lakshmi daas par karahu dayaa ki kor॥

।। eti lakshmi chaalisaa sampurnam।।

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