Kali Chalisa Lyrics In Hindi | काली चालीसा

Kali Chalisa Lyrics In Hindi

आइये जानते है काली चालीसा कैसे पढ़ना है और इसके फायदे क्या है? काली चालीसा का पाठ करने और इसे सिद्ध करने के लिए आपको एकाग्रता की आवश्यकता होती है। माता काली, जगत जननी माँ जगदम्बा का उग्र स्वरूप है। और शत्रुओ का विनाश करने के लिए माता ने यह रूप धारण किया था।

अगर आप श्री काली चालीसा को पढ़ते है। अपने जीवन आने वाले शत्रुओ से आपकी रक्षा होगी और आप मुसीबतो से बचे रहेंगे। माँ काली का नाम मात्र सुनकर भुत पिशाच काँप उठते है। आप अपने जीवन में निर्भय बनाना चाहते है तो आपको यह चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए।

इसे सिद्ध करने किये लिए आपको इसका 108 बार पाठ करना अनिवार्य है। तभी यह आपके लिए सिद्ध होगा। काफी लोगो का यह कहना है की महाकाली चालीसा सिद्ध होने के पश्यात माता ने उन्हें अपने सव्पन में दर्शन दिए।

Kali Chalisa In Hindi Lyrics

॥ दोहा ॥

जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार
महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥

॥ चालीसा ॥

अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥
अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता ॥1॥

भाल विशाल मुकुट छवि छाजै । कर में शीश शत्रु का साजै ॥
दूजे हाथ लिए मधु प्याला । हाथ तीसरे सोहत भाला ॥4॥

चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे । छठे त्रिशूल शत्रु बल जांचे ॥
सप्तम करदमकत असि प्यारी । शोभा अद्भुत मात तुम्हारी ॥6॥

अष्टम कर भक्तन वर दाता । जग मनहरण रूप ये माता ॥
भक्तन में अनुरक्त भवानी । निशदिन रटें ॠषी-मुनि ज्ञानी ॥8॥

महशक्ति अति प्रबल पुनीता । तू ही काली तू ही सीता ॥
पतित तारिणी हे जग पालक । कल्याणी पापी कुल घालक ॥10॥

शेष सुरेश न पावत पारा । गौरी रूप धर्यो इक बारा ॥
तुम समान दाता नहिं दूजा । विधिवत करें भक्तजन पूजा ॥12॥

रूप भयंकर जब तुम धारा । दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा ॥
नाम अनेकन मात तुम्हारे । भक्तजनों के संकट टारे ॥14॥

कलि के कष्ट कलेशन हरनी । भव भय मोचन मंगल करनी ॥
महिमा अगम वेद यश गावैं । नारद शारद पार न पावैं ॥16॥

भू पर भार बढ्यौ जब भारी । तब तब तुम प्रकटीं महतारी ॥
आदि अनादि अभय वरदाता । विश्वविदित भव संकट त्राता ॥18॥

कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा । उसको सदा अभय वर दीन्हा ॥
ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा । काल रूप लखि तुमरो भेषा ॥20॥

कलुआ भैंरों संग तुम्हारे । अरि हित रूप भयानक धारे ॥
सेवक लांगुर रहत अगारी । चौसठ जोगन आज्ञाकारी ॥22॥

त्रेता में रघुवर हित आई । दशकंधर की सैन नसाई ॥
खेला रण का खेल निराला । भरा मांस-मज्जा से प्याला ॥24॥

रौद्र रूप लखि दानव भागे । कियौ गवन भवन निज त्यागे ॥
तब ऐसौ तामस चढ़ आयो । स्वजन विजन को भेद भुलायो ॥26॥

ये बालक लखि शंकर आए । राह रोक चरनन में धाए ॥
तब मुख जीभ निकर जो आई । यही रूप प्रचलित है माई ॥28॥

बाढ्यो महिषासुर मद भारी । पीड़ित किए सकल नर-नारी ॥
करूण पुकार सुनी भक्तन की । पीर मिटावन हित जन-जन की ॥30॥

तब प्रगटी निज सैन समेता । नाम पड़ा मां महिष विजेता ॥
शुंभ निशुंभ हने छन माहीं । तुम सम जग दूसर कोउ नाहीं ॥32॥

मान मथनहारी खल दल के । सदा सहायक भक्त विकल के ॥
दीन विहीन करैं नित सेवा । पावैं मनवांछित फल मेवा ॥34॥

संकट में जो सुमिरन करहीं । उनके कष्ट मातु तुम हरहीं ॥
प्रेम सहित जो कीरति गावैं । भव बन्धन सों मुक्ती पावैं ॥36॥

काली चालीसा जो पढ़हीं । स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीं ॥
दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा । केहि कारण मां कियौ विलम्बा ॥39॥

करहु मातु भक्तन रखवाली । जयति जयति काली कंकाली ॥
सेवक दीन अनाथ अनारी । भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी ॥40॥

॥ दोहा ॥

प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ ।
तिनकी पूरन कामना, होय सकल जग ठाठ ॥

।। इति काली चालीसा समाप्त ।।


Kali Chalisa In English Lyrics

॥ dohaa ॥

jaykaali kalimalaharan, mahimaa agam apaar
mahish mardini kaalikaa, dehu abhay apaar ॥

॥ chaalisaa ॥

ari mad maan mitaavan haari । mundmaal gal sohat pyaari ॥
ashtabhuji sukhdaayak maataa । dushtadalan jag men vikhyaataa ॥1॥

bhaal vishaal mukut chhavi chhaajai । kar men shish shatru kaa saajai ॥
duje haath lia madhu pyaalaa । haath tisre sohat bhaalaa ॥4॥

chauthe khappar khadg kar paanche । chhathe trishul shatru bal jaanche ॥
saptam karadamakat asi pyaari । shobhaa adbhut maat tumhaari ॥6॥

ashtam kar bhaktan var daataa । jag manaharan rup ye maataa ॥
bhaktan men anurakt bhavaani । nishadin raten hrishi-muni jyaani ॥8॥

mahashakti ati prabal punitaa । tu hi kaali tu hi sitaa ॥
patit taarini he jag paalak । kalyaani paapi kul ghaalak ॥10॥

shesh suresh n paavat paaraa । gauri rup dharyo ek baaraa ॥
tum samaan daataa nahin dujaa । vidhivat karen bhaktajan pujaa ॥12॥

rup bhayankar jab tum dhaaraa । dushtadalan kinhehu sanhaaraa ॥
naam anekan maat tumhaare । bhaktajnon ke sankat taare ॥14॥

kali ke kasht kaleshan harni । bhav bhay mochan mangal karni ॥
mahimaa agam ved yash gaavain । naarad shaarad paar n paavain ॥16॥

bhu par bhaar badhyau jab bhaari । tab tab tum praktin mahtaari ॥
aadi anaadi abhay vardaataa । vishvavidit bhav sankat traataa ॥18॥

kusamay naam tumhaarau linhaa । usko sadaa abhay var dinhaa ॥
dhyaan dharen shruti shesh sureshaa । kaal rup lakhi tumro bheshaa ॥20॥

kaluaa bhainron sang tumhaare । ari hit rup bhayaanak dhaare ॥
sevak laangur rahat agaari । chausath jogan aajyaakaari ॥22॥

tretaa men raghuvar hit aai । dashakandhar ki sain nasaai ॥
khelaa ran kaa khel niraalaa । bharaa maans-majjaa se pyaalaa ॥24॥

raudr rup lakhi daanav bhaage । kiyau gavan bhavan nij tyaage ॥
tab aisau taamas chadh aayo । svajan vijan ko bhed bhulaayo ॥26॥

ye baalak lakhi shankar aaa । raah rok charanan men dhaaa ॥
tab mukh jibh nikar jo aai । yahi rup prachalit hai maai ॥28॥

baadhyo mahishaasur mad bhaari । pidit kia sakal nar-naari ॥
karun pukaar suni bhaktan ki । pir mitaavan hit jan-jan ki ॥30॥

tab pragti nij sain sametaa । naam padaa maan mahish vijetaa ॥
shumbh nishumbh hane chhan maahin । tum sam jag dusar kou naahin ॥32॥

maan mathanhaari khal dal ke । sadaa sahaayak bhakt vikal ke ॥
din vihin karain nit sevaa । paavain manvaanchhit phal mevaa ॥34॥

sankat men jo sumiran karhin । unke kasht maatu tum harhin ॥
prem sahit jo kirati gaavain । bhav bandhan son mukti paavain ॥36॥

kaali chaalisaa jo padhhin । svarglok binu bandhan chadhhin ॥
dayaa driashti herau jagadambaa । kehi kaaran maan kiyau vilambaa ॥39॥

karahu maatu bhaktan rakhvaali । jayati jayati kaali kankaali ॥
sevak din anaath anaari । bhaktibhaav yuti sharan tumhaari ॥40॥

॥ dohaa ॥

prem sahit jo kare, kaali chaalisaa paath ।
tinki puran kaamnaa, hoy sakal jag thaath ॥

।। eti kaali chaalisaa samaapt ।।

आशा करते है आपको काली चालीसा पसंद आया होगा। हम pdf जल्द ही उपलब्ध कराएँगे। अपने अनुभव कमेंट में जरूर साझा करे।

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