Argala Stotram PDF In Hindi | श्री अर्गला स्तोत्र

नमस्कार दोस्तों , इस पोस्ट के द्वारा आप को Argala Stotram PDF In Hindi को Download करने के लिए देने वाले है, यह पीडीएफ Geeta Press से ली गई है। यह आप को पीडीएफ के अलावा इसके lyrics भी दिए गए है। आप Argala Raksha Stotra के benefits भी यह जान पाएंगे और इस स्त्रोत का बारेमे भी और राम रक्षा स्तोत्र के लाभ,चमत्कार और फायदे(fayde) भी बताया गया है। इस Stotra का आप को hindi और sanskrit में इसका meaning भी दिया गया है।

Argala Stotram In Hindi | अर्गला स्तोत्र का अर्थ इन हिंदी

श्री दुर्गा सप्तशती में देवी कवच के बाद अर्गला स्तोत्र के पाठ करने का विधान है। अर्गला का अर्थ होता है अग्रणी या अगड़ी। सबसे आगे रहना, विजयी होना, सफल होना । किसी भी कार्य की सिदधि के लिए आबश्यक है कि आप आगे बढ़कर अपना और दूसरों का मार्ग प्रशस्त करें।संसार में कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसका समाधान देवी न करती हों।

Argala Stotram PDF In Hindi
Argala Stotram PDF In Hindi

बस, उनको सच्चे दिल से पुकारने की जरूरत है। अर्गला स्तोत्र के यूं तो समस्त मंत्र ही सिदध हैं। ये सभी मारण और वशीकरण मंत्र हैं। सभी मंत्रों में हम देवी भगवती के सभी रूपों से कामना करते हैं कि हमको रूप दो, जय दो, यश दो और शत्रुओं का नाश करो। मनुष्य जिन जिन कार्यों की अभिलाषा करता है, वे सभी कार्य अर्गला स्तोत्र के पाठ मात्र से पूरी हो जाती हैं।

समस्त कार्यों में विजयश्री इस पाठ मात्र को करने से प्राप्त होती है। देवी कवच के माध्यम से पहले चारों ओर सुरक्षा का घेरा बनाया जाता हैं। उसके बाद अर्गला स्तोत्र से देवी भगवती से विजयश्री की कामना की जाती है। अर्गला स्तोत्र अमोघ है। रूप, जय, यश देने बाला है। नवरात्रि में इसको पढ़ने का विशेष विधान और महत्व है।

Argala Stotram Benefits In Hindi | अर्गल स्त्रोत के फायदे व लाभ

  • इस स्तोत्र के पाठ नित्यम से आत्मज्ञान प्राप्त होता है। और काम, क्रोध और शत्रु का नाश होता है।
  • यह एक ऐसा पवित्र स्तोत्र है, जिस काम की आप कामना करते है अभिलाषा करते है, वह काम इस के पाठ से विहिर्ण हो जाते है।
  • इस पाठ के अनुसार जो भी मनुष्य इस का पाठ करता है, सप्तशती जप संख्या से मिलने वाला श्रेष्ठ फल उसे प्राप्त होता है और उसके पास प्रचुर संपत्ति भी प्राप्त होती है।
  • इस स्तोत्रम के जाप से व्यापार में वृद्धि होती है ।इसलिए यह स्तोत्र उन लोगों के लिए अति महत्वपूर्ण है जिन्हें व्यापार में हानि हुई हो।
  • इस स्तोत्रम को पढ़ने से जीवन में धन और सफलता में वृद्धि होती है।
  • यदि नियमित रूप से इस स्तोत्रम का पाठ किया जाये तो देवी दुर्गा आपको हमेशा सफल होने का आशीर्वाद देती हैं।
  • अर्गला स्त्रोत का जाप करने से सुन्दर रूप की प्राप्ति होती है। रूप का मतलब आपक केवल सौंदर्य  के सन्दर्भ में न लें बल्कि रूप से तात्पर्य है की इंसान की पूर्ण ख़ूबसूरती 
  • मनुष्य जिन जिन कार्यों की अभिलाषा करता है, वे सभी कार्य अर्गला स्तोत्र के पाठ मात्र से सारे व्यवधान दूर हो जाते हैं। समस्त कार्यों में “विजय” इस पाठ मात्र को करने से प्राप्त होती है। 
  • अरगला स्तोत्रम का नियमित जाप आपको अपने जीवन से सभी नकारात्मकता और बुराइयों को दूर रखने में मदद कर सकता है।इसका जाप आपको हमेशा साकारात्मक रखता है।
  • अच्छे जीवनसाथी की पत्नी प्राप्ति और विवाह के लिए अर्गला- स्तोत्र’ का एक पाठ करने से सुलक्षणा पति या पत्नी की प्राप्ति संभव हो जाती है

Argala Stotram Lyrics In Hindi (अर्गल स्त्रोत हिन्दी में )

॥ अथार्गलास्तोत्रम् ॥
ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुर्ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः,

श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतयेसप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥

ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥

मार्कण्डेय उवाच
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।

जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥2॥

मधुकैटभविद्राविविधातृवरदे नमः।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥3॥

महिषासुरनिर्णाशि भक्तानां सुखदे नमः।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥4॥

रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥5॥

शुम्भस्यैव निशुम्भस्य धूम्राक्षस्य च मर्दिनि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥6॥

वन्दिताङ्‌घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥7॥

अचिन्त्यरुपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥8॥

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥9॥

स्तुवद्‌भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि१॥10॥

चण्डिके सततं ये त्वामर्चयन्तीह भक्तितः।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥11॥

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥12॥

विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥13॥

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥14॥

सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥15॥

विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥16॥

प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥17॥

चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्‍वरि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥18॥

कृष्णेन संस्तुते देवि शश्‍वद्भक्त्या सदाम्बिके।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥19॥

हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्‍वरि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥20॥

इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्‍वरि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥21॥

देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पविनाशिनि।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥22॥

देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥23॥

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥24॥

इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः।

स तु सप्तशतीसंख्यावरमाप्नोति सम्पदाम्॥25॥

॥ इति देव्या अर्गलास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Argala Stotram PDF In Hindi | अर्गल स्त्रोत का पाठ

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